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60 रुपये की चोरी -2

60 रुपये की चोरी -1 अब तक तो मुझे भी सुनैना की आदत हो चुकी थी , जब तक हर रोज उसके मुंह से उसकी बातें नहीं सुन लेती मुझे चैन ही न मिलता ।लेकिन वह अपने घर में व्यस्त होगी सोचकर मैनें भी दो-तीन दिन तक नहीं बुलाया ।मैं नहीं चाहती थी कि वह अपने सास-ससुर को छोड मेरे पास आकर बैठे । दो-तीन दिन बाद (जब उसके सास-ससुर चले गये)मेरे सामने खड़ी बस रो रही थी मुझे उसके रोने का कोई कारण समझ न आया । मैने पूछा तो बोली "दीदी शादी में जाते समय सासू माँ ने मुझे अपना पर्स दिया था और उसमे कुछ रुपये थे" मुझे लगा शायद वह पर्स किसी ने छीन लिया, दिल्ली जैसे शहर में यह आम बात है बोली "नहीँ दीदी !पर्स किसी ने नहीँ छीना मुझे जैसा उन्होने दिया था, वैसा ही मैने लौटा दिया मुझे अजन्मे बच्चे की कसम मैने उसे नहीँ खोला" कसम खा कर मानो वह अपनी सफाई देना चाह रही थी और रोए जा रही थी बात अभी भी मेरी समझ से बाहर थी , लेकिन उसकी बात जानने की जितनी उत्सुक्ता थी , उससे कहीं ज्यादा मुझे उसका रोना परेशान कर रहा था । इतना हंसने खेलने वाली सुनैना को इस तरह गिडगिडा कर रोते हुए मैने पहली बार देखा था । जैसे-तैसे पानी...

60 रुपये की चोरी - 1

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बात लगभग अढाई साल पुरानी है , हम दिल्ली में थे हमारे साथ वाले फलैट में एक नव-विवाहित पति-पत्नी रहते थे, नये ही आए थे और अभी केवल चार-पाँच माँह पूरव ही शादी हुई थी हाथों में चमचमाता सफ़ेद- लाल रंग का चूडा , हरदम मेंहदी से रंगे हाथ , पैरों में पायल की छ्न-छन, कलियों सी नाजुक , फ़ूलों सी छटा बिखेरती , सुन्दर सी साडी में सजी सुनैना की शर्माती हुई कोमल सी मासूम आंखें अनायास ही किसी को भी अपनी ओर आकर्षित कर लेतीं । ईश्वर नें उसे रूप ही इतना सुन्दर दिया था कि कोई भी देखने वाला देखता ही रह जाता , और वह नव-विवाहित दुलहन आंखे झुका शर्म से जब हल्की सी मुस्कान चेहरे पर बिखेरती तो लगता कोई ताजा-ताजा कली चटक के फ़ूल अपना सौन्दर्य बिखेरने को बेताब है । उसके साथ एक अजीब सा रिश्ता बन गया था, वो मुझे दीदी कहती और मैं उसे सुनैना , क्योंकि उसकी आँखें बहुत खूबसूरत थी पति राजीव किसी कंपनी में कंप्यूटर इंजीनियर था और सुनैना भी अध्यापिका थी बहुत खुश रहते दोनों ही हम दोनों ड्यूटी से आने के बाद थोड़ा मन बहलाने के लिए बाहर सीढियों पर ही बैठ जाती और कितनी ही देर तक बातें करती सुनैना हरदम खुश रहती, आँखों में अजीब ...