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जून, 2010 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

चुभन-भाग ६

यह स्लिप राकेश नें ही दी थी और लिखा था...... " मुझे माफ़ कर देना नलिनी ,आभारी हूँ तुम्हारा की तुमने मुझे अच्छे प्यार की परिभाषा समझा कर मेरी जिन्दगी में एक नयापन ला दिया और मैं नए सिरे से प्यार के उस रूप की कल्पना करने लगा जिसको मैंने पहले कभी महसूस ही न किया था अपनेपन के अहसास नें मेरा जीवन , सोच समझ सब बदल दिया था और अब मैं तुम्हें जिंदगी भर की खुशियां देना चाहता था , हर पल तुम्हारे साथ जी लेना चाहता था मैं भी चाहता था , अपना छोटा सा खुशहाल परिवार , प्यारा सा घर और ढेर सारी खुशियाँ , नन्ही किलकारियों को सुनाने की हसरत मेरे मन में भी पनपने लगी थी , लेकिन जब तक मैं अपना यह सपना पूरा कर पाता तब तक बहुत देर हो चकी थी ।मुझे अचानक से पता चला कि मैं एच .आई.वी पाज़िटिव हूं । मैनें तुम्हारे और बच्चों के अस्पताल में बिना तुम्हें बताए सभी टैस्ट करवाए हैं , शुक्र है तुम तीनों पर इसका कोई प्रभाव नहीं है । मैनें बच्चों के नाम हम दोनों के नाम पर ही रिंकु और नीलु रखे हैं ।मैं नहीं चाहता कि मेरी परछाई भी इन मासूम बच्चों पर पडे । इसलिए मैं सब छोड-छाड कर जा रहा हूं , कहां ? मैं खुद नहीं जानता ।...

चुभन- भाग ५

नलिनी को इस तरह फ़ूट-फ़ूट कर रोते हुए मैने पहली बार देखा था । अब मुझे अपनी बेवकूफ़ी का अहसास हुआ । मुझे नलिनी की व्यथा सुने बिना उससे इस तरह बात नहीं करनी चाहिए थी पर अब बोली हुई बात वापिस तो नहीं आ सकती थी ,मैने नलिनी को अपनी बाहों में भर लिया और वो थोडी देर यूंही मुझे चिपक कर रोती रही । न जाने कितने सालों से ये आंसु बह जाने को बेताब थे और मौका मिलते ही हर बांध तोड बह निकले । कुछ देर बाद नलिनी थोडा शांत हुई तो मैनें उसे आराम करने को कहा और कमरे से बाहर आ गई । शायद नलिनी के मन का बोज थोडा हल्का हो चुका था और उसे भी नींद आ गई । जब तक नलिनी सोई रही मैं उसी को लेकर परेशान होती रही । दो बार कमरे के अंदर झांक कर देखा कि कब जागे और कब मैं उसके बारे में आगे जान पाऊं । आखिर नलिनी के साथ ऐसा क्या हुआ होगा , यही सोच-सोच कर मैं बैचेन हुए जा रही थी । मैनें शाम की चाय बनाई और नलिनी के पास कमरे में ही ले गई । नलिनी जगी तो कुछ ताज़ा महसूस कर रही थी । मैं चाह कर भी एकदम से फ़िर क्या हुआ न पूछ पाई । थोडी इधर-उधर की बातें और फ़िर बातों ही बातों में मैने उसके स्वयं-सेविका बन यूं गली-गली में जाकर भाषण झाड्ने का...