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चुभन - 1

उम्र लगभग पैंतीस , सुशिक्षित , नौकरी पेशा , दो बच्चों की मां , आदर्श पत्नी ,निम्न मध्यम वर्गीय , पारिवारिक , संस्कारों से सुसज्जित , हर कदम फ़ूंक-फ़ूंक कर रखने वाली , रात के काले स्याह तम में एकटक दीवार पर टंगी पुरानी तस्वीर को घूरती और सुबह होते ही जुट जाती एक ऐसे कार्य में , जो करने के बारे में कभी उसने सपने में भी न सोचा था । न तो जिसके बारे में उसे कोई समझ थी और न ही वह उसे समझना चाहती थी । लेकिन विधि की विडम्बना कि जिस कार्य से उसका दूर-दूर तक कोई वास्ता न था उसी को पूरे तन मन से अंजाम दे रही थी । इस बात से अंजान कि जो वह कर रही है , उसमें वह कभी सफ़ल हो भी पाएगी या नहीं लेकिन कहते हैं कि जब इरादे नेक हों और लगन सच्ची तो रास्ते आसान हो ही जाते हैं । नलिनी का मार्ग इतना आसान न था । वह जिस मार्ग पर तन्हा निकल पडी थी वह टेढा-मेढा , कांटों भरा और और हर कदम पर औरों के तानों के चुभने वाले शूल थे । जानती थी कि वह जिस पथ पर चल रही है उसकी कोई मंजिल दूर-दूर तक कहीं नज़र ही नहीं आती , फ़िर भी मन में संतोष था कि अगर वह दो-चार कदम भी नाप पाई तो एक नई राह तो दिखा ही देगी । बस चाह थी दूसरों के ...