बौना कद
बौना कद दुबला पतला शरीर , गोरा रंग ,चेहरे से झलकता आत्म-विश्वास ,साढे पाँच फुट कद , चाल ऐसी कि चले तो उसका कद वास्तविक से कहीं लम्बा लगता , असंभव शब्द जिसकी डायरी में कभी था ही नहीं ,हर समस्या का हल और हर कार्य में (चाहे घर हो या बाहर )सिद्धहस्त , उम्र लगभग तीस साल ,सॉफ्टवेयर इन्जीनियर की पत्नी और स्वयं प्राध्यापिका , एक कुशल गृहिणी के साथ-साथ सुधा एक ममतामयी माँ ( जिसकी आँखों में न जाने नन्हे कदमों से चलते अपने बेटे के भविश्य लिए कितने सपने समाए है ) स्वयं को सबसे समझदार समझती समझती भी क्यों न अब तक सबकुछ समझदारी से जो किया था और तीस साल की उम्र तक न जाने कितनी ही मुश्किलो को समझदारी से हल कर परिवार की समस्याओं का समाधान किया था यह केवल दिखावा नहीं था , वास्तव में स्वभाव ही ऐसा था ,इसीलिए सुधा को क्या मायका क्या ससुराल....हर जगह भरपूर प्यार मिला कहीं चार रिश्तेदार इक्कठे होते तो सुधा की समझदारी की चर्चा अवश्य होती जिसे सुनकर पहले मायके वालों का सीना चौडा होता था और शादी के बाद ससुराल वालों की छाती गर्व से फूल जाती सुधा को कभी अपने ऊपर घमंड नहीं हुआ और न ही कुछ अच्छा करके बार-बार जताने...